Devlok mein karma bandhte hai
हाँ. Jain धर्म में karma-devlok (देवलोक) में भी बन्धन बनते हैं।
- कर्म हर जगह बन्धन डालते हैं, चाहे जन्म किसी मनुष्य/संयमित प्राणी के जैसा भू रहा हो या देवलोक में हो.
- देवलोक में रहने की खुशी और अवधि कर्मों के पुण्य-पाप के परिणाम से मिलती है, लेकिन यह बन्धन खत्म नहीं होते. देवताओं की आयु और सुख Karma द्वारा निर्धारित होते हैं, और अंततः वे भी मोक्ष प्राप्ति के लिए कर्मों से मुक्त होने का प्रयास करते हैं।
- मोक्ष तभी संभव है जब सभी प्रकार के कर्मों का σωधारण (निरोध) और छेदना किया जाए—यह केवल देवलोक में नहीं, बल्कि जन्म-मरण के चक्र से दूर रहने के लिए जरूरी है।
संक्षेप में: देवलोक में भी कर्म बन्धन चलते रहते हैं; केवल उसके सुख-स्वरूप और आयु अधिक होने के कारण अनुभव सुखद रहता है, परन्तु मोक्ष के लिए कर्मों से मुक्त होना आवश्यक है।