Naseeb se jyada kisiko kuch milta nahi hain?
ये कहावत “नसीब से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता” एक तरह का फटाफट निष्कर्ष है। जैन धर्म के अनुसार सच ये है:
- कर्म ( karma ) ही परिणाम बनाते हैं: हमारे कर्मों के कारण ही हमें’avenir (फल) मिलते हैं।
- लेकिन सिर्फ नसीब नहीं, कर्म-फलों को भी हमारे विचारों-आचरण से बदला जा सकता है: सही सोच, संयम, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह आदि से पुराने कर्मों के प्रभाव कम हो सकते हैं और नए बेहतर परिणाम बनेंगे।
- इसलिए न सिर्फ किस्मत पर निर्भर रहना ठीक नहीं है; विवेकपूर्ण कर्म-योग से भाग्य को बदला जा सकता है।
- एक दूसरे शब्दों में: भाग्य (नसीब) एक हिस्सा है, पर हमारे विचार-व्यवहार और आत्म-शुद्धि से उसका प्रभाव घटाया जा सकता है और अच्छा प्रभाव पाया जा सकता है।
संक्षेप में: नसीब एक हिस्सा है, पर सही धर्म-आचरण और तप-संयम से आप अपने भविष्य के परिणामों को सुधार सकते हैं।