Agami 24 tirthankar kahase moksh jayenge
जैन धर्म के अनुसार, वर्तमान अवसर्पिणी काल में कुल 24 तीर्थंकर हुए हैं, जिनमें से अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी थे। भगवान महावीर स्वामी ने पावापुरी (बिहार) में निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया था।
"आगामी 24 तीर्थंकर" का उल्लेख वर्तमान काल के सन्दर्भ में नहीं है, क्योंकि भविष्य में तीर्थंकर केवल उत्सर्पिणी काल में आएँगे, और अभी के लिए, हमारे लिए 24 तीर्थंकर ही मान्य हैं। प्रत्येक तीर्थंकर ने भिन्न-भिन्न स्थानों पर मोक्ष प्राप्त किया है, परंतु वर्तमान भारतवर्ष में सामान्यतः पाँच मुख्य सिद्धक्षेत्र माने जाते हैं:
- सम्मेद शिखरजी (झारखंड)
- गिरनार जी (गुजरात)
- चंद्रगिरि और विंध्यगिरि (श्रवणबेलगोला, कर्नाटक)
- पावापुरी (बिहार)
- मांगी-तुंगी (महाराष्ट्र)
इनमें सबसे अधिक तीर्थंकरों (20 तीर्थंकर) ने सम्मेद शिखरजी से मोक्ष प्राप्त किया, जबकि महावीर स्वामी ने पावापुरी से। अगले (आगामी) तीर्थंकर की चर्चा वर्तमान में नहीं होती, क्योंकि 24 तीर्थंकरों की परंपरा इस काल में पूर्ण हो चुकी है।
संक्षेप में: 24 तीर्थंकरों में से अधिकांश ने सम्मेद शिखरजी से मोक्ष प्राप्त किया, और अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी ने पावापुरी से मोक्ष प्राप्त किया। भविष्य के तीर्थंकरों की बात वर्तमान अवसर्पिणी काल में नहीं होती।