pADMAVATI MATA STROTA LYRICS
पदमावती माता स्तोत्र (Padmavati Stotra) Jain धर्म में पद्मावती देवी के गुणगान और कृपा के लिए पढ़ी जाने वाली भक्ति-स्तुति है। नीचे मूल पाठ का छोटा-snippet और सरल अर्थ दे रहा हूँ; पूरा पाठ आप नीचे दिये लिंक पर देख सकते हैं।
1) मूल पाठ (श्री पद्मावती स्तोत्र की शुरुआत/डोहा-चालीसा का पाठ हिस्सा) श्री शुक्ल पद्मावती जननी, मम हृदय बस कमलासिनी। ध्याऊँ निन्तर भक्त पारस, नाथ ज्योति प्रकाशिनी।।
2) सरल अर्थ (arth)
- Padmavati माता को Jain शासन की रक्षा करने वाली देवी, जिना पारसनाथ के साथ जुड़ी यक्षिणी माना जाता है, उनके चरणों में अपना 마음 लगाए जाते हैं।
- पाठक अपने हृदय को कमल की तरह पवित्र और शांत रखने की प्रेरणा पाते हैं।
- देवी Padmavati से भक्त पारसनाथ के लिए प्रकाश-ज्ञान और सुरक्षा चाहते हैं, ताकि धार्मिक मार्ग में अवरोध दूर हों और शुभ फल प्राप्त हों।
- यह स्तोत्र Jain धर्म के अनुरूप अहिंसा, धर्म-आचार और पुण्य की भावना के साथ पढ़ना चाहिए।
ध्यान दें ( Digambar बनाम Shwetambar दोनों पर):
- Padmavati देवी को Parshvanath (23वें तीर्थंकर) की रक्षक देवी के रूप में मानना आदि स्वरूप एक समान है; परंपराओं के अंतर्गत पाठ की प्रस्तुति, शब्द-रचना या क्रम में संक्षिप्त भिन्नताएं मिल सकती हैं। सामान्य सिद्धांत यही है कि देवी पद्मावती मोक्ष-मार्ग के अनुसार शुद्ध आचार, भक्ति और साहस प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं।