शास्त्र का स्वाध्याय करते समय पांच प्रकार के कौन से अर्थ ध्यान देने योग्य हैं
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पुस्त्र स्वाध्याय के पांच प्रकार (पाँच प्रकार के अर्थ/अर्थार्थ) नीचे स्पष्ट हैं:
- पाठ (पढ़ना): पूर्व अध्यम ग्रन्थ का मौखिक पाठ या पठन।
- वाचन-व्याख्या: पाठ के साथ उसका स्पष्टार्थ/कथन, व्याख्या करना।
- पृच्छना (शास्त्रार्थ पूछना): Shastra के अर्थ या व्याख्या की पूछताछ करके स्पष्टकरण लेना।
- अनुप्रेक्षा (मनन/विचार करना): बार-बार शास्त्र के विषयों पर गहराई से विचार करना और शंका दूर करना।
- धर्मकथा-चरित्र पाठ: धर्मकथा या आग्रह-चरित्रों के अध्ययन, उनके आचार-विहार से शिक्षा लेना।
इन पाँचों प्रकार से स्वाध्याय सम्पूर्ण होता है और मोक्षमार्ग के लिए आवश्यक माने जाते हैं।