जैन धर्म में नव पद कौन से होते हैं
नव पद (Nav Pad) जैन धर्म में नौ प्रमुख पथ-स्तंभ या पद होते हैं। ये नौ पङ्दों के रूप में पूजे जाते हैं और इनके अनुसार जीवन दिशा तय की जाती है।
नव पद की सूची:
- Arihant
- Siddha
- Acharya
- Upadhyaya
- Sadhu (Sadhvi)
- Darshan (Right Faith)
- Gyan (Right Knowledge)
- Charitra (Right Conduct)
- Tapa (Right Austerities)
व्याख्या (arth) - सरल-भाव:
- Arihant: ऐसे जागे हुए पुरुष/महिलाएं जिन्होंने मन, विषय और कर्म के भीतर के दुश्चक्र पर विजय पाई हो और KEVALJNAN प्राप्त किया हो।
- Siddha: मुक्त आत्मा, जिसने सभी कर्मों को नष्ट कर Moksha प्राप्त किया हो।
- Acharya: संघ के प्रमुख आचार्य; धर्म ज्ञान के शिक्षण-निर्देशनकर्ता।
- Upadhyaya: गुरु/शिक्षक जो शास्त्रों और दर्शन की शिक्षा देते हैं।
- Sadhu: Jain साधु/साध्वी; तप-त्याग और 5 महाव्रत आदि का पालन करते हैं।
- Darshan: सही विश्वास (दृष्टि) की धारा।
- Gyan: सही ज्ञान की धारणा।
- Charitra: सही आचरण; सिद्धान्तों का जीवन में अनुपालन।
- Tapa: तपस्या और आस्तिकता के अभ्यास।
ध्यान दें:
- इन नौ पादों के बारे में जैन समुदायों (Śvetāmbara और Digambara) के बीच मूल विचार समान रहता है, और दोनों भाष्य/पूजा में इन्हीं नौ पदों को भी माना जाता है। कुछ पंक्तियों या पूजा-प्रथाओं में विविधताएँ स्थानीय परंपराओं के अनुसार हो सकती हैं, पर मूल तत्व एक ही रहते हैं।
- Navpad पूजा/चैत्यवंदन जैसी प्रथाओं इन नौ पादों को समर्पित हैं और इनसे मोक्षमार्ग पर आत्मा के उत्थान का उद्देश्य जोड़ा जाता है। You can read more here
नोट:
- अगर आप चाहें, मैं इन नौ पलों के बारे में किसी विशेष पाद की विस्तृत व्याख्या (Digambara बनाम Śvetāmbara के संदर्भ सहित) भी दे सकता हूँ।