3.5 crore shlok ki rachna kisne ki
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3.5 करोड़ श्लोकों की रचना का उल्लेख केवल जैन धर्म के संदर्भ में मिलता है। जैन परंपरा के अनुसार, आचार्य श्री धर्मसेन ने "शतकंडागम" (षटकंडागम) की रचना की थी। ऐसा माना जाता है कि मूलरूप से आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूतबली ने लगभग 3.5 करोड़ (35 मिलियन) श्लोकों का ज्ञान प्राप्त किया था, लेकिन समय के साथ यह ज्ञान संक्षिप्त होता चला गया। अंततः उसका सारांश "षटकंडागम" और "कसायपाहुड़" जैसे ग्रंथों में संकलित किया गया।
संक्षेप में: 3.5 करोड़ श्लोकों का ज्ञान आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूतबली को प्राप्त हुआ था, जिसे आगे चलकर षटकंडागम आदि ग्रंथों के रूप में संकलित किया गया।
यह विवरण केवल जैन धर्म के शास्त्रों और परंपराओं पर आधारित है।