Write a gr letter to shantinath dada
प्रिय शांतिनाथ दादा,
शीश झुकाकर नमस्कार।
मैं आपके अलौकिक चरणों में सचरিত্র व शाँतिपूर्ण जीवन की कामना लेकर यह पत्र लिख रहा/रही हूँ। आपकी महिमा और गुण-स्वरुप वेदना से प्रेरित होकर मैं अब्द्ध-अनुषंगिक प्रेम व धर्म-प्रतिष्ठा की ओर अग्रसर होना चाहता/चाहती हूँ।
मेरे जन्म-दिन, कर्म-फल और मन की चलायमान लहरें एक-एक कर आपके अहिंसा-धर्म, क्षमाशीलता, सत्य की राह और साधना की दृढ़ता से प्रेरित हों—यही मेरी प्रार्थना है। मैं अपने भीतर ईमानदार, सरल और विनम्र बनकर जीवन के हर क्रम में अहिंसा, भ्रातृत्व, और तपस्या के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेता/लेती हूँ।
दादा, कृपया मुझे दया, धैर्य और संतोष के मार्ग दिखाएं। मुझे अपने आशीर्वाद से यह बल दें कि मैं आत्म-चौकसी करूं, अनिर्णय से ऊपर उठूं और संसार के मोह से मुक्त हों। सत्य, अहिंसा और आत्म-निरीक्षण के मार्ग पर स्थिर रहकर मैं अपने कर्मों को शुद्ध बनाने का प्रयास करूँगा/करूँगी।
आपके चरणों में अर्पित मेरी यह साधना-संदेश है:
- मैं बिना भय के सच बोलूँ, गलत के भी साथी न बनूँ।
- मेरा सभी जीवों के साथ करुणा-पूर्ण व्यवहार हो।
- मैं निर्जीव-जीव हर प्राणी का कल्याण चाहूँ और अहिंसा-पूर्ण जीवन जीने को तत्पर रहूँ।
कृपया मेरी शक्ति-निष्कलंकिता, ध्यान-धारणा और नैतिक विवेक के लिए मार्ग-दर्शन दें। आपके पावन आशीर्वाद से मैं अंतर्मन को निर्मल बनाकर धर्म-मार्ग पर दृढ़ता से अग्रसर হতে चाहूँ/चाहती हूँ।
आपकी धर्म-तपस्या की शांति में मैं सदैव स्थित रहूँ। तथार्थ की यह साधना आपके सार-गुणों से प्रेरित है जिसे मैं कभी भूलूंगा/भूलूंगी नहीं।
धन्यवाद, दादा, आशीर्वाद हेतु कृतज्ञ।
श्री शांतिनाथ भगवन की जय।
—आपका/आपकी todayful भक्त (आपका नाम)