किसका रोग आत्मा के आरोग्य को प्रदान करता है?
जैन धर्म के अनुसार, "कायिक रोग" (शारीरिक रोग) आत्मा के आरोग्य को प्रदान करता है, अर्थात् शरीर के रोग आत्मा के शुद्धिकरण में सहायक हो सकते हैं। जब व्यक्ति अपने शरीर के रोगों को सहन करता है और संयम, तपस्या तथा सम्यक् दृष्टि के साथ उनका सामना करता है, तो वह आत्मा के आरोग्य (शुद्धि) की ओर अग्रसर होता है। जैन आगमों में कहा गया है कि बाह्य रोग (शारीरिक कष्ट) आत्मा के आंतरिक दोषों को मिटाने का साधन बन सकते हैं, यदि उन्हें सम्यक भाव से सहा जाए।
संक्षिप्त में: शारीरिक रोग आत्मा के आरोग्य (पवित्रता/शुद्धि) को प्रदान कर सकते हैं, जब उन्हें संयम, समता और धर्म के अनुसार सहन किया जाए।