Pukkhar var divaddhe
55
यह शब्द तुरंत पहचान में नहीं आ रहा है. संभव है कि किसी सही स्पेलिंग या विशेष पाठ (जैन शास्त्र/स्तोत्र) का भाग हो, पर सही अर्थ और मूल पाठ बताने के लिए संदर्भ चाहिए।
अगर आप कृपया सही शब्दावली या संदर्भ दें (कौन से ग्रंथ या स्त्रोत से है, या किसी पूरी पंक्ति/श्लोक का भाग), तो मैं:
- मूल पाठ उसी शब्दावली के साथ देकर,
- आर्थ ( arth ) स्पष्ट और authentic Jain मान्यताओं के अनुसार समझा दूँ,
- दिविगंबर/श्वेताम्बर पर विभेद स्पष्ट कर दूँ,
- और संभव हो तो संबंधित जैनknowledge.com पेज के लिंक के साथ साझा कर दूँ.
ध्यान दें: मैं जैनधर्म के puurva-परम्परागत अर्थ के अनुसार ही उत्तर दूँगा और अन्य दार्शनिक/धर्मों के विवेचन से अलग रखूँगा.