करुणानुयोग के ग्रन्थों के नाम
करुणानुयोग (Karananuyog) के प्रमुख ग्रंथ चार हैं:
- Prathmānuyoga (प्रथमानुयोग) — जीव-स्वरुप, उनके चरित्र-जीवन आदि काbiography-सा वर्णन।
- Karnanuyoga (करणानुयोग) — ब्रह्मांड की संरचना, कर्म-धर्म आदि के व्याख्या; कर्म-प्रकृति की महत्त्वपूर्ण व्याख्या।
- Charṇānuyoga (चरणानुयोग) — अनुष्ठ, भाव-चेतना, श्रोताओं/संन्यासियों के लिए आचरण-नीति आदि।
- Drav ya nu yog (द्रव्यानुयोग) — पदार्थ-म metaphysics और वास्तविकता पर विचार।
नोट:
- इन चारों अनयुगों में सूचना का प्राथमिक स्रोत दिगंबर और श्वेतांबर परंपराओं में थोड़ा-बहुत भिन्न हो सकता है, परंतु मूल विचार और उद्देश्य समान रहते हैं: सही Faith (सम्यग-darshana), ज्ञान और मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शन।