Nanami ka panchachar ka kausagga
नण्मी (नवकार) का पंचाचार का कौसग्ग
जैन धर्म में नवकार मंत्र (नण्मी) का पंचाचार का कौसग्ग एक विशेष साधना है, जिसमें नवकार मंत्र का स्मरण करते हुए पंचाचार (पाँच चरित्र) पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। पंचाचार जैन धर्म के मुख्य पाँच आचार (आचरण नियम) हैं:
- ज्ञानाचार – सही ज्ञान का आचरण
- दर्शनाचार – सही दर्शन (श्रद्धा) का पालन
- चारित्राचार – सही चरित्र या आचरण
- तपाचार – तप (साधना, संयम) का पालन
- वीर्याचार – उत्साह और पराक्रम का आचरण
पंचाचार का कौसग्ग करने की विधि:
- शांत स्थान पर बैठकर शरीर को स्थिर करें।
- तीन बार 'णमो अरिहंताणं' से लेकर 'णमो लोए सव्व साहूणं' तक नवकार मंत्र का उच्चारण करें।
- इसके बाद, पाँचों आचारों का ध्यानपूर्वक स्मरण करें:
- "मैं ज्ञानाचार का पालन करता हूँ, दर्शनाचार का पालन करता हूँ, चारित्राचार का पालन करता हूँ, तपाचार का पालन करता हूँ, वीर्याचार का पालन करता हूँ।"
- इस भावना से कौसग्ग (शरीर व मन से समर्पण भाव) करें कि मैं पंचाचार में दृढ़ रहूँ और इनका पालन करूँ।
- अंत में, 'एष पंचणमोक्कारो...' की भावना करें और समस्त जीवों के कल्याण की कामना करें।
महत्त्व: इस कौसग्ग से आत्मशुद्धि, संयम, और आत्मिक शक्ति बढ़ती है। यह साधना जैन साधकों को पंचाचार में स्थिर रहने की प्रेरणा देती है।
यदि आपको इसकी संस्कृत या प्राकृत विधि चाहिए, तो कृपया बताएं।