6 vighai konsi hai
इन छः को हिन्द-जीवन में हिन्दू-धर्म के साथ अलग-अलग नामों से कहा जाता है, पर जैन धर्म में इन्हें “छः विकार / छः प्रबल आवेग” कहा जाता है:
- क्रोध (Krodh) – अति गुस्सा या हिंसा के भाव
- मान/गर्व (Mana/Mada) – आत्म-गौरव, अहंकार
- छल/कपट (Chaala/Maya) – झूठ-फरेब,欺骗
- लोभ (Lobha) – अधिक लालच और सुख-संपत्ति की चाह
- राग (Raga) – पदार्थ, व्यक्ति या सुख से लगाव
- मोह (Moha) – भ्रमित होना, वास्तविकता से डगमगाना
संक्षेप में: ये छह प्रवृत्तियाँ दिल, मन और कर्म को दूषित कर मुक्ती की राह रोकती हैं. इनसे दूर रहने के उपाय Jain साधना में शास्त्रों के अनुसार अभ्यास, संयम और त्याग के मार्ग से होते हैं.