कौन कोए का मांस तय कर स्वर्ग में देर हुआ
लगता है आपने जो सवाल लिखा है उसका थोड़ा spelling-टिप्पणी स्पष्ट नहीं है। “कौन कोए का मांस तय कर स्वर्ग में देर हुआ” जैसा वाक्य मुझे सीधे किसी प्रसिद्ध जैन शास्त्र-कथन से नहीं मिल रहा। फिर भी जैन धर्म की मूल शिक्षा के अनुसार जहाँ-जहाँ हिंसा (हिंसा) है, वहाँ करम बंधते हैं और आत्मा के मोक्ष-मार्ग में देरी होती है। सही मायने में:
- जैन धर्म में मांसाहार और किसी भी जीव के हत्या/हिंसा से करम बोझ बढ़ते हैं।
- स्वर्ग आदि वितरण भी करमों पर निर्भर रहता है; अधिक करम पाने से स्वर्ग की यात्रा देर हो सकती है, या जन्म-जन्मांतर में ऊँचे लोकों तक जाने की क्षमता बाधित हो सकती है।
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में कुछ अर्थों में पाठिक-व्याख्या में भिन्नताएँ पाई जाती हैं, लेकिन दोनों में अहिंसा का उच्चतम महत्व है।
यदि आपका प्रश्न किसी विशेष कथानक, श्लोक, या किसी प्रति-उद्धृत कथा से जुड़ा है, कृपया उसे साफ-साफ लिख दें (उदा. किस ग्रंथ/सutra-नाम, किस कथा की बात कर रहे हैं). मैं उसी के अनुसार, मूल पाठ (यदि माँगते हैं) और तदनुसार सही अर्थ (arth) तथा Digambar/Shwetambar की भिन्नता के अनुसार स्पष्ट कर दूँगा।
आप चाहें तो मैं आपके लिए अहिंसा/कर्म-गुण के बारे में जैनKnowledge की उपयुक्त पन्नों से संदर्भ भी दे दूँ। You can read more here