Shravak ke pure varsh me kul kitne pratikraman hote he
जैन धर्म में श्रावक (गृहस्थ अनुयायी) के लिए प्रतिदिन दो बार प्रतिक्रमण करना आदर्श माना गया है—एक बार प्रातः (देवसी) और एक बार संध्या (रायसी)। इस प्रकार, एक वर्ष में कुल प्रतिक्रमण की संख्या इस तरह होगी:
प्रति दिन = 2 प्रतिक्रमण एक वर्ष = 2 × 365 = 730 प्रतिक्रमण
इसके अलावा, कुछ विशेष पर्वों (जैसे: पर्युषण, अष्टानिका आदि) के दौरान अतिरिक्त प्रतिक्रमण भी किए जा सकते हैं, लेकिन नियमित रूप से श्रावक के लिए पूरे वर्ष में कुल 730 प्रतिक्रमण होते हैं।
सारांश: श्रावक के पूरे वर्ष में कुल 730 प्रतिक्रमण होते हैं।