अभिषेक (abhishek) की बिधि Jain धर्म में महत्त्वपूर्ण पूजा पूरक कर्म है, खासकर तीर्थंकर की मूर्ति या जिनालय के मूर्तिपाठ के समय। नीचे सरल और आम प्रचलित steps दिए जा रहे हैं; विभिन्न संप्रदायों में कुछ स्पeसिफिक परिवर्तन हो सकते हैं।
Abhishek की सामान्य बिधि (सरल रूप)
- मंदिर के अंदर या घर पर साफ-सफाई और शांत वातावरण बनाएं।
- पानी, दूध, दही, शहद, शक्कर, तैल/घी, घी या तिलक, रंगीन चंदन, कौती-चंदन का पेस्ट आदि तैयार रखें।
- पवित्र मंत्रों का जाप शुरू करें (जैन नवरात्र मंत्र, नमो अरिहंताणं आदि) और नागर-ओंकार/आणव के पाठ के साथ।
- मूर्ति, मुर्तिका या जिनालय की प्राण-प्रतिष्ठा के स्थान को हल्के जल से पोंछकर साफ करें।
- यदि मूर्ति पर धूल हो तो उसे मुलायम कपड़े से साफ करें।
- पहले पानी से अभिषेक करें ताकि धुल-धूसर मिट जाए।
- फिर दूध से अभिषेक करें; यदि दूध का उपयोग करें, तो थोड़ा समय के लिए छोड़ दें और बाद में पानी से क्लीन करें।
- दही और शहद से पुष्प-समагम (मिश्रण) करें, ताकि शीतलता और शुद्धता बनी रहे।
- फिर शक्कर/शहद मिलाकर थोड़ा मीठा रस बनाएं और मूर्ति/स्थान पर छिड़कें।
- तिल-तैल (घी/सरसों का तेल) का अंश डालकर पुताई जैसी हल्के हाथों से लगाए जाएं।
- अंत में जल से अंतःशुद्धि और पवित्रता की कामना करें।
- नवार्तन/Navkar मंत्र का जाप करें।
- पंचामृत (अगर बनता हो) के साथ अभिषेक करें: दूध, दही, गुड़, घी, शहद का मिश्रण—जो विभिन्न परंपराओं में एक जैसा नहीं, इसलिए आप अपने घर/गुरु की परंपरा के अनुसार करें।
- अभिषेक के पश्चात मूर्ति के सामने भोग/प्रसाद रखें।
- आरती और स्तुतियाँ गाएं (जैन धाम के प्रतिमा-पूजन में आमतौर पर सुगंधित धूप, तोरण-शोभा आदि का भी प्रयोग होता है)।
- प्रायश्चित्त या स्वयं-निवेदन:
- पूजा के बाद मन से संयम, क्षमा, आदि विविध वैरागिक विचार दोहराएं।
- प्रक्रिया के अंत में मूर्ति को शांत रहने दें; फिर अपने-अपने स्थान पर लौटें।
ध्यान देने योग्य बिंदु (Digambar बनाम Shwetambar के बीच सामान्य फर्क)
- Digambar-शास्त्र में मूर्तिपूजा/अभिषेक के स्वरूप में कुछ स्थानों पर थोड़ा अलग नियम हो सकता है; कुछ समुदाय मूर्ति पर कम से कम स्पर्श/अभिषेक को प्राथमिक मानते हैं जबकि श्वेताम्बर पर परंपरा-विशेष के अनुसार विभिन्न पदार्थों के प्रयोग की व्यापकता रहती है।
- अंततः, अभिषेक की मौलिक भावना श्रद्धा, पवित्रता और तीर्थंकर की शिक्षाओं की स्मृति बनाए रखना है; वास्तविक पदार्थों की सूची और क्रम आपके घर/गुरु की परंपरा के अनुसार थोड़ा-बहुत बदल सकता है।
अगर आप चाहें, मैं आपके विशिष्ट संप्रदाय (Digambar या Shwetambar) के अनुसार sanctioned अभिषेक की क्रमबद्ध बिधि (स्टेप-बाय-स्टेप) और मंत्र-उच्चारण भी बता दूँ।