अभिषेक की बिधी
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अभिषेक (abhishek) की बिधि Jain धर्म में महत्त्वपूर्ण पूजा पूरक कर्म है, खासकर तीर्थंकर की मूर्ति या जिनालय के मूर्तिपाठ के समय। नीचे सरल और आम प्रचलित steps दिए जा रहे हैं; विभिन्न संप्रदायों में कुछ स्पeसिफिक परिवर्तन हो सकते हैं।
Abhishek की सामान्य बिधि (सरल रूप)
- तैयारी:
- मूर्ति/स्तम्भ की सफाई:
- अभिषेक (जल-पूजन) चरण:
- आस्था-उपवासिक भाग:
- प्रसाद/आरती:
- प्रायश्चित्त या स्वयं-निवेदन:
- निष्कर्ष:
ध्यान देने योग्य बिंदु (Digambar बनाम Shwetambar के बीच सामान्य फर्क)
- Digambar-शास्त्र में मूर्तिपूजा/अभिषेक के स्वरूप में कुछ स्थानों पर थोड़ा अलग नियम हो सकता है; कुछ समुदाय मूर्ति पर कम से कम स्पर्श/अभिषेक को प्राथमिक मानते हैं जबकि श्वेताम्बर पर परंपरा-विशेष के अनुसार विभिन्न पदार्थों के प्रयोग की व्यापकता रहती है।
- अंततः, अभिषेक की मौलिक भावना श्रद्धा, पवित्रता और तीर्थंकर की शिक्षाओं की स्मृति बनाए रखना है; वास्तविक पदार्थों की सूची और क्रम आपके घर/गुरु की परंपरा के अनुसार थोड़ा-बहुत बदल सकता है।
अगर आप चाहें, मैं आपके विशिष्ट संप्रदाय (Digambar या Shwetambar) के अनुसार sanctioned अभिषेक की क्रमबद्ध बिधि (स्टेप-बाय-स्टेप) और मंत्र-उच्चारण भी बता दूँ।