Jain dharm ke logo ko hindu devi devata ka poojana chahiye kya
संक्षेप में जवाब: नहीं। जैन धर्म में पूजा का केंद्र तिर्थंकरों (अहिंसा, कीर्तन, ध्यान आदि के मार्ग) और गुरुओं/आचार्यों की ऊँचाई पर है, न कि हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा पर।
थोड़ा विस्तार:
- मुख्य उद्देश्य: अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह आदि नियमों का पालन कर मोक्ष की दिशा में चलना; यह तिर्थंकरों के ज्ञान और उनके उपदेशों में है।
- देवी-देवताओं की भूमिका: कुछ सांस्कृतिक रीतियों में हिन्दू देवी-देवताओं का सम्मान दिखाया जा सकता है, पर वह धार्मिक Worship नहीं माना जाता; उन्हें जैन धर्म के भीतर पूर्ण आराध्या नहीं माना जाता.
- डिगंबर और श्वेतांबर दोनों संप्रदायों में भी यही केंद्रबिंदु बना रहता है: तिर्थंकरों और आचार्यों की भक्ति/उपासनाएं प्रमुख हैं; हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा अनिवार्य या मुख्य धारा नहीं है.
- व्यवहारिक सुझाव: अपनी साधना-संयम, दान-पुण्य, प्राणायाम, सम्यक द्रष्टि आदि पर ध्यान दें; जरूरत पड़ने पर पंक्ति-प्रत्यायन/प्रatikraman आदि का अभ्यास करें।
अगर आप चाहें, मैं आपके लिए सरल मार्ग पर एक छोटा अभ्यास-सूची बना सकता हूँ ताकि जैन धम्म के अनुसार पूजा-अर्चना का अभ्यास साफ़-साफ़ समझ में आ जाए।