Kya jain dharm ke logo ko bheru ji ki pooja karna chahiye
संक्षेप में उत्तर: नहीं. जैन धर्म में सामान्यतः केवल तीर्थंकरों, सिद्धों और पारमिताओं की पूजा की जाती है और इसे केंद्रित किया जाता है। भैरु जी (Bhairav/Bhairav devta) हिंदू-पारंपरिक देवता है और यह जैन सिद्धांत के अनुरूप नहीं माना जाता।
क्या अलग-अलग जैन संप्रदायों में कुछ विविधता है?
- Digambar और Shwetambar दोनों के मूल उद्देश्य और पूजन-आचार सामान्यतः तीर्थंकरों, देवी-देवताओं के भगवती-स्तवन, अर्चक-व्रत आदि पर केंद्रित रहते हैं। भैरु जी जैसी लोक-देवताओं की पूजा जैन धर्म की प्रामाणिक साहित्यिक धारा में सामान्य नहीं मानी जाती।
- कुछ परिवार या समुदाय स्थानीय रीतिरिवाज के अनुसार निजी स्तर पर नयन-देवताओं या ग्राम-देवताओं की भक्तिभाव से पूजा कर लेते हैं, पर यह जैन धर्म की आध्यात्मिक शिक्षाओं (अहिंसा, अपरिग्रह, सही-दर्शन) के पक्ष में या उनके आदर्शों के अनुरूप नहीं माना जाता।
अगर आप चाहें, मैं जैन धर्म की पूजा-पाठ के प्रमुख तत्वों (जैसे तीर्थंकर-पूजा, पंचमप्रथा, नमस्कार, आरती आदि) के बारे में सरल और स्पष्ट ब्योरा दे सकता हूँ।