Jain dharm shivji ki pooja karni chahiye
संक्षेप में जवाब: Jain dharm में Shivji ki puja ya bhakti ko प्रमुख धर्म-कर्तव्य नहीं माना जाता. Jainismo का मुख्य पूज्य-अभिगम Tirthankaron (जैन तीर्थंकरों) और उनके आदर्शों की अनुगमन है. Shivji (हिंदू-देवता) को जैन मान्यताओं के अनुसार moksha-मार्ग का प्रत्यक्ष मार्गदर्शक नहीं माना जाता, न ही वे जैन साधना के केंद्रीय लक्ष्य हैं.
स्पष्ट बातें:
- जैन साधना का केंद्र है Right Faith (सत्य Faith), Right Knowledge (सत्य ज्ञान), Right Conduct (सत्य आचरण) और तीर्थंकरों की आराधना/वंदना. इसे अक्सर पारसनाथ, महावीर आदि तीर्थंकरों की प्रतिमाओं या उनसे जुड़ी शिक्षाओं के माध्यम से किया जाता है.
- कुछ जैन पंडित या समुदाय हिंदू देवताओं के प्रति सम्मान दिखाते हैं, पर यह पूजा-संस्कार के रूप में नहीं, बल्कि आस्थात्मक-सम्मान के रूप में ही माना जाता है. अंतिम उद्देश्य मोक्ष और आत्मा की शुद्धि है.
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में तीर्थंकरों की पूजा का मूल स्वर समान रहता है, पर रीतियाँ और प्रथाएं अलग हो सकती हैं. Shivji की संबद्ध पूजा धर्म के केंद्र में नहीं आती.
अगर आप चाहें, मैं आपको Tirthankar puja के सही अरथ (अर्थ) और सामान्य Jain प्रथाओं के बारे में सरल शब्दों में समझा सकता/सकती हूँ.