Kya digamber jain me dksha lene ke baad ling khada nhi hota hai
संक्षेप में जवाब:
- हाँ, Digambar जैन मुनि बनते समय पूर्ण ब्रह्मचर्य (celibacy) का पालन करते हैं। यह मानसिक, शारीरिक और भाषिक सभी स्तरों पर है।
- शरीर में अचानक होने वाली शारीरिक उतेजना प्राकृतिक हो सकती है, लेकिन मुनि इसे व्यवहार में नहीं लाते और किसी प्रकार की कामुक क्रिया से बचते हैं।
- Diksha लेने के बाद मुनि का मुख्य उद्देश्य अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह आदि महाव्रतों का पालन है; लिंग की घंटा-घंटी जैसी शारीरिक उतेजना भी हो तो उसे नियंत्रित रखना चाहिए।
ध्यान देने योग्य बातें:
- Digambar परंपरा में मुनि (sky-clad) का मार्ग पुरुषों के लिए है; महिलाओं के लिए Aryika/आ Aryika-diksha होती है, पर वे भी महाव्रतों का कठोर पालन करती हैं। यह अलग बात है मगर इससे ब्रह्मचर्य का मूल सिद्धांत समान है.
- मुनियों के लिए सेक्स या प्रेम-संबंध की अनुमति नहीं होती; शारीरिक संबंध केवल गृहस्थों के लिए वैध है और वे भी नियंत्रण में रहते हैं.
संदर्भ के लिए:
- Digambar diksha केवल पुरुषों के लिए (मुनि-diksha)—संरचना और मतभेद का सार यहाँ है.
- Monks: sex/स्नान आदि पर ब्रह्मचर्य का कड़का नियम और गृहस्थों के लिए सीमित संयम.
नोट: अगर आप चाहें, मैं इस विषय पर और संक्षिप्त सार दे सकता/सकती हूँ।