Khooni se Muni Kaun Bane
जी हाँ. जैन धर्म में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति हिंसा या अपराध कर भी खींचा गया हो, तब भी वह सही प्रक्रिया अपनाकर पूर्ण वैरागी बन सकता है। मुनि बनने के लिए मुख्य बात यह है कि वह व्यक्ति गहरे तरीक़े से पाप-क्षमाप्रार्थना (क्षमांण), तप, संयम और अहिंसा के मार्ग पर चलने की सच्ची प्रेरणा रखें।
संक्षेप में: -IGN: गुरु-ग्रहण के बाद व्यक्ति घर-परिवार छोड़कर संन्यास ले सकता है। -प्रक्रिया: सम्यक दर्शन-सम्प्रदाय के अनुसारdiksha (संन्यास-प्रवेश) लेना, फिर तप, नियम और ब्रह्मचर्य आदि के आचार-विचार अपनाने होते हैं। -धर्म-सार: हिंसा को त्यागना, अपरिग्रह रखना, और बहुविध-सम्वेदना (anekantavada) को समझना—ये मुनि बनने की मुख्य धारणाएं हैं। -डिगंबर/श्वेताम्बर दोनों परंपराओं में मूल उद्देश्य समान रहता है, हालांकि कुछ कर्म और विधानपथ में छोटे-छोटे भेद होते हैं।
अगर आप चाहें, मैं इसे साक्ष्यों के साथ समझाते हुए एक-एक चरण और कैसे Diksha ली जाती है, उसके बारे में सरल भाषा में और बता दूँ।