Navkar aaradhak shiv kumar mar kar kon si gati mei gaye
जैन धर्म के अनुसार, किसी भी जीव की मृत्यु के बाद वह किस गति (स्वर्ग, नरक, तिर्यंच, या मनुष्य) में जाएगा, यह उसके कर्मों पर निर्भर करता है। किसी विशिष्ट व्यक्ति—जैसे "Navkar aaradhak Shiv Kumar"—की मृत्यु के बाद वे किस गति में गए, इसका निर्धारण केवल सर्वज्ञ (केवलज्ञानी) भगवान ही कर सकते हैं। साधारण मनुष्य, बिना केवलज्ञान के, यह नहीं बता सकते कि कोई जीव मरने के बाद किस गति में गया है।
जैन शास्त्रों के अनुसार, यदि किसी ने अपने जीवन में नवकार मंत्र का सही भाव से आराधन किया, अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह आदि का पालन किया, और पुण्य कर्म संचित किए, तो उसकी गति उत्तम हो सकती है। लेकिन अंतिम निर्णय जीव के संचित कर्मों और मृत्यु के समय के भाव (मरणांतक भावना) पर निर्भर करता है।
सारांश: किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी गति का निर्णय केवल उसके कर्म और अंत समय के भावों से होता है, और इसका सही ज्ञान केवल केवलज्ञानी भगवान को होता है।