आयम्बिल अनशन में आता है या रसपरित्याग में
संक्षेप में: आयम्बिल एक बाह्य तप (bahya tap) है, जो रसपरित्याग (taste/स्वाद से परहेज़) के अनुसार किया जाता है। इसी तरह के तप के अंतर्गत आयम्बिल को rasparityag का भाग माना जाता है—यानी स्वाद की आसक्ति छोड़कर एक दिन में एक साधारण भोजन लेना। इसलिए आयम्बिल अनशन नहीं है बल्कि रसपरित्याग के अंतर्गत आने वाला एक व्यवस्थित तप है।
कुछ अहम बिंदु:
- आयम्बिल का उद्देश्य: स्वाद से विरक्ति बढ़ाना, चित्त शुद्ध करना, और नैतिक/आचारिक अभ्यास संजोना।
- समय-सूची: श्वेतांबर-दिगंबर दोनों परंपराओं में यह 9 दिनों के आयम्बिल ओḷी/Navpad Oli के रूप में मनाया जाता है; हर दिन navapad (आरीहंत, सिद्ध, आदि) की आराधना के साथ साधना चलती है।
- फर्क: दिगंबर और श्वेतांबर परंपराओं में liturgical क्रम और छोटे नियम अलग हो सकते हैं, लेकिन मूल भावना वही रहती है—रसपरित्याग और Tap (तपन) के माध्यम से आत्मा की शुद्धि।
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