Digambar Alochana path lyrics
Here is the Digambar/Shwetambar Alochana Path (Alochana Paath) with the opening and closing doha, along with the typical sakhi chhand verses. I’ve kept to the common-text format found in many Digambar and Shwetambar recitations.
Original text (typical form)
- Doha (opening)
- Saakhi chand (verses following the doha)
इक बे ते चउ इंद्री वा, मनरहित-सहित जे जीवा तिनकी नहीं करुणा धारी, निरदई हो घात विचारी ॥३॥
समरम्भ समारम्भ आरम्भ, मन वच तन कीने प्रारम्भ ... (आगे के पंक्तियाँ Digambar/Shwetambar recensions में छोटे-छोटे भेद जो बनते रहते हैं)
- Dohā (closing couplet)
- Anuvini (बर्फ़ित विविध पाठों में हस्ताक्षर/अनुवर्तन)
Notes on variation
- Alochana Path के शब्द Digambar और Shwetambar पर छोटा-सा भेद रखते हैं, पर उसका मूल भाव वही रहता है: आत्मा की आलोचना/आलोचना, दोषों का क्षमा, पापों से निवृत्ति, और सद्गति की प्रतिज्ञा।
- ऊपर दिया गया पाठ का प्रारम्भ और समापन भाग सामान्य रूप से अधिकांश गाव-आलोचना पाठ में मिलता है; बीच के verses में शब्द-भेद हो सकता है।
अर्थ (arth) | Jain Dharma के अनुसार
- प्रमुख उद्देश: अपने भीतर की भूल-चूक (thoughts, speech, actions) को मानना, क्षमा माँगना, और सही आचरण की ओर पुनः प्रस्थान का संकल्प लेना।
- कर्म-शुद्धि: आत्मा के कामन-ईश्वर के रूप में क्षमा-याचना से क्षमायोग और पुनः संयम बनता है।
- 5 गुरु और चौबीस जिनराज को नमस्कार कर आत्म-परिशुद्धि की आरम्भिक प्रकिया।
- समस्त जीवों की मंगल-शुख की कामना, और अंततः चरण-शरण की आराधना।
Digambar बनाम Shwetambar का उल्लेख
- पंक्तियों के कुछ शब्द-भेद हो सकते हैं (उदा. कठिन शब्दों या क्रम में छोटे परिवर्तन), पर उद्देश्य और भाव वही रहते हैं: दोष-स्वीकृति, क्षमा, व्रत-पुष्टि, और सही मार्ग पर स्थिरता।
- अगर आप अपने ప్రత్యేక संहितात्मक पाठ (Digambar बनाम Shwetambar) के अनुरूप सही शब्द चाहते हों, तो मैं उसी पाठ के अनुसार अरथ स्पष्ट कर दूँगा।
अगर आप चाहें, मैं विशिष्ट Digambar या Shwetambar संस्करण के पूरे पाठ और लाइन-दर-लाइन अर्थ दे सकता हूँ।
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