ऐसी कौन से महापुरुष है जिनको पंच पद अरिहंत सिद्ध उपाध्याय आचार्य और सर्व साधु का पद मिला है
संस्कृत/तन्त्र के अनुसार पंच परमेष्ठी पाँच अलग-अलग महत्त्वपूर्ण पद हैं: अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु। ये सभी एक ही महापुरुष के पास एक साथ नहीं रहते—ये पाँचों पद पृथक- पृथक होते हैं और हर पद के लिए अलग-अलग महापुरुष प्रतिष्ठित माने जाते हैं।
- अरिहंत और सिद्ध: ये जैन साधनाओं के उच्चतम अवस्थाएँ हैं; आचार्य/उपाध्याय/साधु ये पाँचों में से आऱंभिक या अंतिम स्थिति नहीं हैं, बल्कि विभिन्न मार्गों के श्रेष्ठ पुरुष/महिलाओं के रूप में माने जाते हैं। उदाहरणार्थ, तीर्थंकर अरिहंत और सिद्ध memperoleh मोक्ष के बाद सिद्ध हो जाते हैं।
- आचार्य और उपाध्याय: ये मोनियों और मुनि-समाज के प्रमुख पद हैं, जिनमें आचार्य समाज-नेतृत्व करते हैं और उपाध्याय एक उच्च शिक्षण-आचार्य होते हैं।
- साधु: यह सामान्य नाम है उन सभी साधु-भगवानों के लिए जो गृह-त्याग कर तप-साधना में लीन रहते हैं।
किसी ने भी एक साथ इन सभी पाँचों पदों को धारण करने की पुष्टि Jain परंपरा में नहीं मिलती; पद-विभाजन अलग-अलग व्यक्तियों के लिए होता है। जिन महापुरुषों ने इनमें से कुछ कुछ पद प्राप्त किए हैं, वे अलग-अलग समय पर अलग-अलग पदों से प्रसिद्ध हुए हैं—पर एक ही व्यक्ति सभी पाँचों पर नहीं बैठा माना जाता।
यदि आप चाहें, मैं पंच परमेष्ठी के नियमों और हर पद की संक्षिप्त व्याख्या ( arth ) को आसान भाषा में और उदाहरणों के साथ समझा सकता हूँ।