व्यंतरेन्द्रों के विमान कितने विस्तार वाले हैं
क्षमा करें, इस वाक्य का स्पष्ट Jain संदर्भ मुझे समझ नहीं आ रहा है। “व्यंतरेन्द्रों के विमान” के बारे में Jain ग्रंथों में स्पष्ट विवरण किसी विशेष कृति या कथा से जुड़ा हो सकता है, लेकिन मुझे यह शब्द ऐसे सीधे संदर्भ में नहीं मिल रहा है।
अगर आप किसी खास ग्रंथ/कथा या लाइन का उल्लेख कर पाएँ (जैसे कि किस संवाद में, कौन से तीर्थंकर/चित्तचिह्न के साथ या किस कालखंड के बारे में), तो मैं उसी के अनुसार सही arth (मतलब) और स्पष्ट विवरण दे दूँगा।