अजीव के भेदों में रूपी कितने रूपी कितने
अजीव के भेदों में “रूपी” अजीव वह भाग है जो रूपधारक पदार्थ (रूपी पदार्थ) से متعلق है। सामान्य Jain धारणाओं के अनुसार:
- अजीव दो बड़े वर्गों में बाँटा जाता है: रूपी (रूपी) अजीव और निर्गुण/रूपीहीन अजीव (अरुपा)।
- रूपी अजीव में पाँच मूल पदार्थ (पञ्चजीव/पञ्च pudgala) आते हैं जिनके अस्तित्व के कारण पदार्थ बनते हैं: पृथ्वी (धरात्व/पृथ्वी), जल, आग (तेज़/अग्नि), वायु और आकाश। ये पाँचों मिलकर rupa (रूपी) अजीव बनाते हैं।
संस्कृत-हिंदी में साफ-साफ कहने के लिए:
- rupa (रूपी) अजीव वही पाँच प्रकार के पदार्थ हैं: पृथ्वी, जल, आग, वायु, आकाश।
- इनके मिलन से महावृत्ति/पदार्थ बनते हैं, जिनमें रूप और स्पर्श आदि गुण होते हैं।
ध्यान दें:
- श्वेतांबर-दिगंबर परंपराओं में rupī अजीव का परिभाषा थोड़ा-बहुत भिन्न हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से यही पाँच पदार्थ rupa अजीव के रूप में स्वीकारे जाते हैं।
- अगर आप Digambar बनाम Shwetambar में भेद का सटीक arth चाहते हैं, तो मैं उस पर भी साफ-साफ अलग-अलग व्याख्या दे सकता हूँ।
अगर आप चाहें, मैं इन विषयों पर संक्षिप्त sutra/arth भी दे सकता हूँ।