Palitana paanch chaityavandan
Palitana के शत्रुंजय पर्वतीय तिर्थ (Shatrunjaya) पर होने वाले “पांच Chaityavandan” का मतलब है Palitana यात्रा के दौरान शात्रुंजय तीर्थस्थल पर गाये जाने वाले पाँच चैत्यवंदन स्तोत्र/पूजा-क्रम। यह पाँचों चैत्यवंदन पाँच प्रमुख संतों/तेरथंकरों के नाम से जुड़े हैं और हर एक में उसी तीर्थ क्षेत्र की महिमा का वर्णन होता है।
पांच चैत्यवंदन कौन-से हैं (पालिताना-शत्रुंजय यात्रा के हिसाब से):
- पहली चैत्यवंदन: Jay Taleti से जुड़ी पहली वंदना (सिद्धहगिरी क्षेत्र/शत्रुंजय तीर्थ के पहले चरण के लिए आराधना)
- दूसरी चैत्यवंदन: श्री शांतिनाथ भगवान से जुड़ी वंदना
- तीसरी चैत्यवंदन: रayon Pagla (Rayan Pagla) से जुड़ी वंदना
- चौथी चैत्यवंदन: श्रीयं पंडरिक स्वामी (Pundarik Swami) से जुड़ी वंदना
- पाँचवी चैत्यवंदन: भगवान आदिनाथ (Rushabhdev) से जुड़ी वंदना
हर चैत्यवंदन में तीर्थ-स्तुति, प्रतिमा-आराधना, धर्म-ज्ञान-निर्वाण आदि के लिए प्रार्थना और ध्यायन-स्तोत्र होते हैं; पलितана के प्रसिद्ध शत्रुंजय‑गिरि तीर्थ पर यह क्रम श्रद्धा और क्रमबद्ध प्रार्थना के रूप में किया जाता है ताकि भक्तों के कषाय नष्ट हों और मोक्षमार्ग सरल बने।
नोट:
- इस पाँच Chaityavandan का स्वरूप कुछ हलके-फुल्के-विवरण Digambar बनाम Shwetambar परंपराओं में अलग नाम-क्रम या पाठ-संस्करण के रूप में दिख सकता है; परंतु मूल उद्देश्य वही है: शत्रुंजय गिरी और पांच तिर्थंकरों की महिमा का पावन स्मरण और आत्म-विकास की प्रार्थना।
अगर आप चाहें, मैं इन पांचों चैत्यवंदनों के मूल पाठ (शास्त्रीय श्लोक) का संक्षिप्त अर्थ बताकर दे दूँ।