कौन धर्म परीक्षा में पास हुये, धर्मलाभ पाकर धन्य बने?
23
आमतौर पर “धर्म परीक्षा” से मतलब उस स्थिति से है जब कोई व्यक्ति धर्म के मूल सिद्धांतों को ठीक-ठीक समझकर और पालन कर करके अपने भीतर के क्लेश (क्लेश: क्रोध, म possibilities) को दूर कर देता है। जो लोग ऐसा करके धर्मलाभ पाते हैं, वे धन्य माने जाते हैं।
मुख्य बाते:
- धर्मलाभ क्या है? यह आचरण, ज्ञान और दर्शन—तीनों की सही समझ और उनके अनुसार जीवन जीना है। इसे संस्कृत में सम्यग्दर्शन (सत्य निष्ठा), सम्यगjnana (सही ज्ञान), और सम्यक्कचरित्र (सही आचरण) कहा जाता है।
- जो व्यक्ति पांच महाव्रतों/सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह आदि को धारण कर धर्म के मार्ग पर चल पड़ते हैं, वे “धर्मलाभ” प्राप्त करते हैं और आत्म-कल्याण की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
- पूर्ण धर्म परीक्षा पार करने वाले—योग्य तीर्थंकरों (जैन धर्म के सदा-स्थित, जैसे महावीर) और उनके अनुयायियों के भीतर—केवल धार्मिक ज्ञान और योग्य आचार के द्वारा मोक्ष की ओर अग्रसर होते हैं।
संक्षेप में: जो व्यक्ति सही ज्ञान, सही दर्शन और सही आचरण को आपसी समन्वय से प्राप्त कर लेता है और उसे जीवन में व्यवहार में लाकर अपने भीतर के क्लेशों को दूर कर देता है, वही धर्म “पार” कर धर्मलाभ पाता है और धन्य बनता है।