Vrushabhjinas bail shobhato
यह वाक्य संभवतः रिषभ जैन (Vrishabhānath) की महिमा का उल्लेख है। रिषभ जैन हिन्द-युग के प्रथम तीर्थंर्क मानते जाते हैं, और उनका प्राण-परीक्षण (vehicle) सिंह नहीं बल्कि बैल (बैल/बैल-प्रतीक) माना गया है। इस तरह “Vrushabhjinas bail shobhato” का अर्थ है: “तीर्थंर्क Vrishabhānath के बैल की महिमा/शोभा।”
संक्षिप्त अर्थ:
- Vrishabhānath: पहले तीर्थंर्क, जिन्हें कई परंपराओं में Adinath के नाम से भी पूजा जाता है।
- bail (बैल): उनके प्रतीक/वाहक के रूप में बैल माने जाते हैं; यह शक्ति, धैर्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
- shobhato (शोभतो): शोभा/शोभा से तात्पर्य उनकी महिमा, आभा और Glory से है।
अगर आप उसी पंक्ति का पूरा मूल पाठ (श्लोक) दे दें, तो मैं उसका ठीक-ठीक अर्थ और Digambar/Shwetambar के अनुसार वैकल्पिक interprétation भी बता दूँगा।