नवकार में 8 संपदा कैसे?
नवकार (Navkar) में 9 पद होते हैं और उनकी पीछे चलने वाली 8 संपदाएँ (संपदा) मानी जाती हैं। संपदाएँ मतलब उन पद्धों/अर्थों का समूह जो नवकार के प्रत्येक भाग के अर्थ से निकलकर भौतिक-आत्मिक प्रभाव बताते हैं। सरल शब्दों में: नौ पदों के पहले सात पदों के अर्थों से आठ संपदाएँ बनती हैं; आखिर के दो पद एक संयुक्त संपदा बनाते हैं। इस प्रकार नवकार का गम्भीर सार “पाँच परमेंष्ठी” को सम्मान देना है—अरिहंत, siddha, आचार्य, उपाध्याय, सत्सु-সাধ्वी।
8 संपदाओं की सामान्य क्रम (Navkār Mantra के पाठ के हिसाब से) इस प्रकार कही जाती है:
- Namo Arihantanam — अरिहंतों को प्रणाम
- Namo Siddhanam — सिद्धों को प्रणाम
- Namo Ayariyanam — आचार्यों को प्रणाम
- Namo Uvajjhayanam — उपाध्यायों को प्रणाम
- Namo Loe Savvasahunam — सभी साधुओं को प्रणाम
- Eso Pancha Namokkaro — यह पाँच-fold प्रणाम
- Savva Pava Panāsano — सभी पापों को नष्ट करने वाला
- Mangalanam Cha Savve-sim — सभी में से मंगलकारक (आशीष)
Padhamam Havai Mangalam (पढ़मान्हवई मंगलम्) आख़िर में आने वाला मंगल-गाथा है और कई पाठों में इसे अलग से मंगल-गायन के रूप में लिया जाता है। Digambar-Shvetambar दोनों Tradition इसे मानते हैं, हालांकि पाठ-प्रयोग में थोड़े शब्द-भालों (उच्चारण) में भिन्नता हो सकती है।
आप नीचे दिए JainKnowledge के पन्नों से इन बातों की सरल व्याख्या भी देख सकते हैं:
ध्यान दें:
- Navkar Mantra में 9 पद होते हैं और 8 संपदाएँ, जो पहले सात पदों के अर्थों से बनती हैं, जबकि अंत के दो पाद एक संयुक्त संपदा बनाते हैं।
- यह मंत्र पाँच परमेष्ठियों के गुणों की वंदना है, व्यक्ति-विशिष्ट नामों की नहीं।
- Digambar और Śvetāmbara दोनों परंपराओं में इसका मूल अर्थ एक ही है; उच्चारण/शब्दावली में कभी-कभी छोटे फर्क मिलते हैं।
अगर आप चाहें तो मैं इन मन्त्र-भागों के हर एक पंक्ति का सरल arth भी दे सकता हूँ।