इन्द्रिय के 23 विकार
इन्द्रिय के विकार (vikaar) एक Jain दर्शन में इन्द्रियों से जुड़ी तर्क-गत समस्याओं को दर्शाते हैं। सामान्यतः इसे दो हिस्सों में समझा जाता है:
- Vishay (विषय): पाँच इन्द्रियों के द्वारा अनुभव किए जाने वाले वस्तु-रूपों के प्रकार/वस्तुएँ जिन्होंने हमारे मन में आकर्षण पैदा किया हो। कुल मिलाकर 23 प्रमुख Vishay बताए जाते हैं (जिनमें देखने-सुनने-चखने-छुए-गंधने से जुड़ी अनुभूतियाँ शामिल हैं)।
- Vikaar (विकार): इन विषयों के प्रति हमारी प्रतिक्रिया या विकार-रूप क्रिया, जो सुख-दुख की अनुभूति से जन्म लेती है और फिरRaag (लालच) या Dwesh (द्वेष) को प्रेरित करती है। Jain ग्रंथों के अनुसार इन विकारों की संख्या अनेकों (240) प्रकार के विकार-रूपों में बँधी हुई मानी जाती है।
सरल समझ:
- जब कुछ इन्द्रिया किसी विषय पर स्पर्श/अनुभव कराती है, तो वह Vishay है।
- फिर मन उस अनुभव पर प्रतिक्रिया (पसंद-नापसंद) बनाता है, जो Vikaar है। यही प्रक्रिया Raag-Dwesh को जड़ बना कर पुनः कर्मों के चक्र को उत्पन्न करती है।
ध्यान देने योग्य बात:
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में सूची और गिनती में छोटे- मोटे अंतर मिलते हैं, पर मूल विचार वही है: इन्द्रियाँ विषय-आकर्षण से शुरू होकर विकार के मार्ग से फिर कर्मों में परिणत होती हैं।
- अक्सर पाठक 23 Vishay और 240 Vikaar जैसी संरचनाओं का उल्लेख देखते हैं; कुछ शिक्षाएँ इन्हीं संख्याओं के आधार पर व्याख्या करती हैं।
यदि चाहें, मैं इस विषय को एक सरल उदाहरण के साथ और अधिक स्पष्ट कर सकता हूँ या Digambar/Shwetambar दोनों परंपराओं के अनुसार किस प्रकार सूची बदली जा सकती है, उसका संक्षेप में सार दे सकता हूँ।