karmo fal den ki itni takat kese aati hai , kon yah san control karta hai in hindi
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जैन धर्म के अनुसार, कर्म (कर्मों) की फल देने की शक्ति स्वयं कर्मों में ही निहित होती है। जब आत्मा (जीव) कोई कार्य, विचार, या भावना करती है, तो उसके अनुसार सूक्ष्म कर्म कण आत्मा से जुड़ जाते हैं। ये कर्म कण आत्मा के चारों ओर बंध जाते हैं और समय आने पर अपने-आप फल प्रदान करते हैं।
कर्मों को फलित करने वाला कोई बाहरी सत्ता या ईश्वर नहीं है। जैन दर्शन मानता है कि प्रत्येक जीव अपने कर्मों का भोग स्वयं करता है। कर्मों की व्यवस्था एक प्राकृतिक नियम है, जिसे कोई नियंत्रित नहीं करता; न तो कोई भगवान, न ही कोई देवता।
संक्षेप में — कर्मों के फल देने की शक्ति कर्मों में ही होती है, और इन्हें कोई बाहर से संचालित नहीं करता। यह पूर्णतः स्वाभाविक और स्वतःस्फूर्त प्रक्रिया है, जो जीव के अपने कर्मों के कारण घटित होती है।