जैन प्रतीक की पांच मुख्य विशेषताएं बताएं
जैन प्रतीक यानी यूनिवर्सल जैन प्रतीक के पांच मुख्य भाग होते हैं:
1) Lok का आरेख (आस्तित्व की तीन लोकों का स्वरूप) – नीचे नरक/आधोलोक, मध्यलोक (भौतिक संसार), ऊपर स्वर्गलोक को दर्शाता है। यह संसार-यात्रा का आधार है। 2) हाथ और wheel (Ahimsa wheel) – हाथ का चिह्न निर्भयता और अहिंसा का प्रतीक है; हथेली पर लगे wheel से 24 तीर्थंकरों के प्रवचनों का संकेत बनता है कि अहिंसा से मोक्ष संभव है। 3) स्वस्तिका – इसके चार शाखा जीवन के चार गतिकी (गति) का स्मरण कराती हैं: नरक, पाप, मानव, देव-स्वर्ग; साथ ही समाज के चार स्तंभों (संघ के चार गुट) का प्रतीक भी मानी जाती है। 4) ऊपर तीन बिंदु – यह Ratnatraya (स Samyak Darshana, Samyak Gyana, Samyak Charitra) को दर्शाते हैं। ये सही दर्शन, ज्ञान और आचरण के तीन स्त्रोत हैं। 5) चंद्रवृत्त (crescent) और एक बिंदु – Siddhashila का प्रतीक; वह स्थान जहां मुक्त आत्मा सीधे मोक्ष प्राप्त कर सद्गति पर रहती है।
इन पाँच भागों के साथ प्रतीक के भीतर “Parasparopagraho Jivanam” (जीव जीवन एक-दूसरे पर निर्भर है) जैसी पंक्ति और अन्यaccine तत्व भी रहते हैं, जो Jain धर्म के मूल संदेश को दर्शाते हैं। अगर आप चाहें तो मैं इन भागों के बारे में Digambar बनाम Śvetambar पर विशेष भिन्नताओं के बारे में भी सरल शब्दों में बता दूँ।