Anuvrat dhari kitni daya ka palan kar sakta hai
अनुव्रत धारी (जो व्यक्ति अणुव्रतों का पालन करता है) जैन धर्म के अनुसार सीमित (सीमित मात्रा में) दया का पालन करता है। वह पंच महाव्रतों की तुलना में छोटे रूप में व्रतों का पालन करता है।
दया (अहिंसा) के संदर्भ में, अनुव्रत धारी मनुष्य, जानवर, कीट आदि की हिंसा नहीं करता, लेकिन उसके लिए कुछ व्यावहारिक छूट होती है। वह केवल इतना ही कर सकता है कि जानबूझकर किसी भी प्राणी की हिंसा न करे। अनुव्रत में पूर्ण अहिंसा का पालन नहीं हो पाता, जैसा कि महाव्रती (मुनि) करते हैं, क्योंकि गृहस्थ जीवन में रहकर कुछ हिंसा अनजाने में हो ही जाती है।
इसलिए, अनुव्रत धारी अपनी क्षमता और परिस्थिति के अनुसार यथासंभव दया का पालन करता है, लेकिन उसकी दया सीमित (relative/partial) होती है। वह जानबूझकर हिंसा, चोरी, असत्य, कुशील और परिग्रह की अधिकता से बचता है।
सारांश: अनुव्रत धारी अपनी सामर्थ्य और गृहस्थ जीवन की सीमाओं के अनुसार, जितनी अधिक दया का पालन कर सके, उतनी दया का पालन करता है, लेकिन उसके लिए पूर्ण दया (अहिंसा) का पालन संभव नहीं होता।