6 niyams of charitpalit sangh
यहां Charipalit Sangh (Padayatra Sangh) के 6 नीयम दिए जा रहे हैं, जो पादयात्रा के समय अपनाए जाते हैं।
1) सम्यXtva धारण (Samyaktva Dharan)
- अर्थ: सही ज्ञान, सही मान्यता और सही आचरण की दृढ़ प्रतिज्ञा रखना; मिथ्या विचारों और मल-दोषों से बचना। यह चारित्र यात्रा की बुनियादी बुलंद दिशा है।
2) एकांशान (Ekashan)
- अर्थ: एक ही भोजन-काल में एक बार भोजन करना; अल्प आहार और संयम बनाए रखना।
3) भूमीशयन (Bhumishayan)
- अर्थ: धरती पर चटाई/दरियान पर सोना; बेलौस शय्या या पलंग से दूर रहना।
4) ब्रह्मचर्य (Brahmacharya)
- अर्थ: काम-वासना से परहेज और शरीरिक-मनोरथों में संयम रखना।
5) पदयात्रा (Padyatra)
- अर्थ: पैदल यात्रा करना; शारीरिक कष्ट सहकर साधना की दिशा में चलना।
6) सच्चित्त Tyag (Sachitt Tyag)
- अर्थ: कच्चे और हरे साग-सब्ज़ियाँ (ख़ास तौर पर कच्ची/हरी चीज़ें) न खाना; शाकाहार में संयम और सरलता बनाए रखना।
टिप्पणी:
- ये छह नियम Padayatra Sangh के मार्ग-निर्देशन हैं और साधु/शास्त्रों में इसे Charipalit sangh या Sangh Yatra के साथ जोड़ा गया है। इन नियमों का मूल उद्देश्य आत्म-संयम, सरलता और मोक्ष की ओर प्रवृत्ति बनाए रखना है।
- Digambar बनाम Shwetambar पर सामान्य तौर पर इन नियमों के मूल अर्थ एक जैसे माने जाते हैं; फिर भी pratiques/उपदेश में क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार भाषा या पालन में हल्का भेद हो सकता है।
यदि आपको इन नियमों के सम्बंध में अधिक विस्तार चाहिए, बताइए—मैं वही धर्म-सार और परंपरा के अनुसार सरल शब्दों में समझा दूँगा.