प्राचीन जैन आचार्य आदि सागर जी का जीवन परिचय चाहिए
आदि सागरजी महाराज (Acharya Shri 108 Adisagarji Maharaj) एक दिगंबर जैन आचार्य थे। नीचे उनके जीवन का संक्षिप्त परिचय है:
- जन्म और मूल परिचय: जन्म नाम — बालगोंडा देवगोंडा पाटिल; जन्म स्थल — Shedbal (कर्नाटक के आसपास), परिजन किसान/ग्रामीन पंथ से थे।
- प्रारम्भिक जीवन: आगम ग्रंथों का अध्ययन करने के बाद वैराग्य की धारणा बनी और वे स्वास्थ्य कारणों से दीक्षा लेना चाहते थे; बीमारी (एनीमिया) के कारण उन्होंने दीक्षा की देरी की इच्छा जताई, पर शांति सागर महाराज ने उन्हें छह माह का समय दिया। health ठीक होने के बाद वे 1954 में मुनि दीक्षा लेने के समर्थ हुए।
- दीक्षा और गुरु: दीक्षा प्राप्त की आचार्य शान्तिसागर महाराज से; उनके नाम पर ही यह क्रम “आदि सागर” के रूप में प्रसिद्ध होता गया।
- स्थिति और योगदान: मुनि दीक्षा के बाद वे कुछ समय ही जीवित रहे और 1955 में Kunthalgiri, महाराष्ट्र में समाधि-मरण (सल्लेखना/समाधि) ली; उनके जीवन को दिगंबर जैन परंपरा में एक साहसी संयमी के रूप में याद किया जाता है।
- परंपरा: उनके गुरु-परंपरा में शान्तिसागर के बाद आये अन्य आचार्यों की कड़ी से जुड़ा हुआ है; आदिसागर जी इस शृंखला के एक प्रमुख सदस्य रहे।
नोट:
- जैन आचार्य आदिसागरजी के बारे में विवरण दिगंबर आचार्य-परम्परा के स्रोतों में मिलता है, और अलग शास्त्रीय परंपराओं में कुछ नाम/तिथियाँ छोटा-मोटा भिन्न हो सकता है। अगर आप Digambar बनाम Shvetambar में किसी खास भेद की चर्चा चाहते हैं, तो बताइए मैं उसी के अनुसार स्पष्ट कर दूँ।
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