... और... Ye do संसार रुपी वृक्ष ke बीज है
यह प्रश्न Jain धर्म से जुड़ा हुआ लगता है, लेकिन “संसार रुपी वृक्ष के बीज” ऐसी किसी canonical (आचार्य-ग्रन्थ) अभिव्यक्ति के रूप में सामान्य Jain साहित्य में नहीं मिलती। आम Jain धारणा में संसार (संसार) जन्म-मरण का चक्र है जो कर्मों (कर्मा) के बीज से बना होता है। जिन कर्मों को रुकवकर या समाप्त करके जीव मोक्ष प्राप्त करते हैं, वही इस वृक्ष के बीज/बीजक समझे जा सकते हैं — पर यह एक रूपक है, वास्तविक वृक्ष के बीज नहीं।
अगर आपका वाक्य संदर्भ-विशिष्ट है (किस sutra, stotra, गीत आदि से लिया गया है) तो कृपया वह संदर्भ दे दें; तब मैं Digambar और Shwetambar परंपराओं के अनुसार सही arth और स्पष्ट व्याख्या दे दूँगा।