जैन तीर्थंकर श्री संभवनाथ स्वामी- जीवन परिचय| Jain Tirthankar Shri Sambhavnath Swami- Life Introduction जैन तीर्थंकर श्री संभवनाथ स्वामी - जीवन परिचय | Jain Tirthankar Shri Sambhavnath Swami - Life Introduction | संभवनाथ भगवान का परिचय चिन्ह घोड़ा पिता
संभवनाथ स्वामी जैन धर्म के तृतीय तीर्थंकर हैं। नीचे उनके जीवन का संक्षिप्त परिचय दिया गया है।
- जन्म स्थान: श्रावस्ती
- पिता: दृढराज (राजा दृढ़राज), माता: सुसेणा
- वंश: इक्ष्वाकु (आवी बंश)
- जन्मकाल: मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को (संस्कृत पंचांग अनुसार)
- चिन्ह/लांगषण: घोड़ा
- आयु: 60 लाख पूर्व
- देहवर्ण: तप्त स्वर्ण सदृश
- वृक्ष: सहेतुक वन एवं शाल्मली वृक्ष
- प्रथम आहार: श्रावस्ती के राजा सुरेन्द्रदत्त द्वारा खीर
- दीक्षा: मार्गशीष (फाल्गुन-शुक्ल पक्ष) के समय, चंद्र/मृगशिरा नक्षत्र के साथ
- केवलज्ञान: दीक्षित हो कर अनेक वर्ष तपस्या के बाद keval ज्ञान प्राप्त किया
- समवसरण: चारूषण आदि गणधर 105
- मोक्ष: सम्मेद शिखर पर 1000 राजाओं के साथ प्रतिमायोग धारण कर चैत मास की षष्ठी के सूर्यास्त समय मोक्ष को प्राप्त किया
- आयु के साथ-साथ ऊँचाई 400 धनुष मानी जाती है
- अवगाहना/वर्ग: 400 धनुष (16 हाथों के बराबर)
- प्रमुख मान्यताएं: Right faith, right knowledge, right conduct (Ratnatraya) की शिक्षा का प्रसार
- समवसरण में 105 गणधर, 2 लाख मुनि, 3 लाख बीस हजार आर्यिका, 3 लाख श्रद्धालु आदि उपस्थित थे
- शंभवनाथ ने अपने जीवन के उत्तरार्ध में पुनः तपश्चर्या और साधना के साथ मोक्ष पाया
- किस Tradition में क्या गर्मजोशी है
- Digambar एवं Shwetambar परंपराओं दोनों में Sambhavnath को तीर्थंकर के रूप में माना गया है और उनका प्रतीक-चिन्ह, जन्म-स्थान आदि बहुत समान हैं, पर कुछ संस्करणों में मान्य तिथियाँ या विवरण थोड़े भिन्न मिलते हैं।
यदि आप चाहें, मैं उनके जीवन के प्रमुख घटनाओं की Chronology को आसान तालिका में भी दे सकता/सकती हूँ।
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