महावीर स्वामी के कितने समवसरण लगे थे
महावीर स्वामी के समवसरण संबंधी कथा के अनुसार अधिकांश परंपराओं में उनके जीवनकाल में दो समवसरण बताए जाते हैं:
- पहला समवसरण शुरू हुआ पर वह परिणाम‑सुखद नहीं रहा, इसलिए उन्होंने दूसरा समवसरण अगले स्थान पर किया। वेबावास (द्वितीय) समवसरण पावा नगर में महासेन के बाग में हुआ माना जाता है, जहाँ उनके प्रवचन व्यापक रूप से प्रभावी रहे और कुछ प्रमुख गणधर (गणधर) बन गए।
- ऐसी कथाएं से Śvetāmbara और Digambara परंपराओं में सूक्ष्म भिन्नताएं मिलती हैं, लेकिन मूल तात्पर्य वही है: kevala jnana के बाद दिव्य समवसरण के माध्यम से सभी जीवों तक उनकीTeachings पहुँचीं।
ध्यान रहे: समवसरण की क्रम और स्थान पर विवरण दृष्टिकोण‑भिन्नताओं के कारण अलग‑अलग ग्रंथों में थोड़ा भिन्न हो सकता है, परन्तु दोनों घटनाएं महावीर के दिव्य उपदेशों के महत्त्व को ही दर्शाती हैं।
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