क्या महावीर स्वामी के आठ समवसरण हुए थे
संक्षेप में उत्तर है:
- महावीर स्वामी के Samavasarana (Divine preaching hall) के साथ “आठ प्रतिहारीय” (Ashṭa Pratihārya) आते हैं, मगर यह आठ समवसरण नहीं है। आठ प्रतिहारीय वे अष्ट-आभूषण/चिन्ह हैं जो सम्वसरण के समय तीर्थंकर के पास होते हैं और उनकी महिमा दर्शाते हैं।texts में इन्हें keval-jnan के बाद तीर्थंकर के साथ स्थायी रूप से जुड़ा माना गया है. ( jainknowledge.com)
आठ प्रतिहारीय कौन-कौन से हैं ( Arth ): 1) Ashoka Vriksha – कल्याणकारी वृक्ष,Seat/सीट का प्रतीक 2) Simhasan – सिंहासन, आधिकारिक सत्ता का प्रतीक 3) Bhamandal – भामंडल, सिर के चारों ओर आभा 4) Tri-chhatra – त्रि-छत्री/तीन-tier छत्री, तीन लोकों पर अधिकार का संकेत 5) Chamara – चामर, मान-सम्मान के प्रतीक 6) Pushpa-vrishti – पुष्पवृष्टि, फूलों की वर्षा (पवित्रता/भक्ति का संकेत) 7) Deva-dundubhi – देव-दंडुभि, दिव्य ध्वनि/ड्रम-ध्वनियाँ 8) Divya-dhVani – दिव्य ध्वनि, ऐसी वाणी जिसे हर श्रावक अपनी भाषा में समझे
ध्यान देने योग्य बातें:
- इन आठ प्रतिहारीयों का संबंध समवसरण से है और ये तीर्थंकर की महानत्ता का प्रतीक माने जाते हैं; अलग-से “आठ समवसरण” की canonical धारण नहीं है। Digambar-श्वेताम्बर दोनों पर ये प्रतिहारीय सामान्य रूप से स्वीकार्य हैं, though नाम-अलग जगह हल्के-फुल्के बदलाव हो सकते हैं। ( jainknowledge.com)
अगर आप चाहें तो मैं इन प्रतिहारीयों के प्रकारों और उनके iconography के बारे में और सरल शब्दों में भी समझा सकता हूँ, या महावीर स्वामी के samavasarana के बारे में अधिक संदर्भ दे सकता हूँ।