वह धार्मिक स्थान जहां धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और जो आमतौर पर गांव में खुला स्थान होता है
यह स्थान सामान्यतः जैन धर्म में “चैत्य” या “देरार/देवर” कहलाता है—यानी जैन मंदिर जहाँ धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-आराधना की जाती है।
- चैत्य: खास तौर पर पूजा-स्थल के रूप में बनता है, कभी-कभी खुला या अर्ध-खुला स्थान भी हो सकता है (विशेषकर पुराने या प्राकृतिक स्थलों में).
- देरार (Derasar): जैन मंदिर को सामान्यतः इसी नाम से पुकारा जाता है;Digambar और Shwetambar परंपराओं के बीच कुछ उल्लेखित भिन्नताएं हो सकती हैं, जैसे वास्तु-रचना या मूर्तियों के प्रकार में अंतर।
संक्षेप में: जहाँ पूजा/अर्चना होती है और जिसका उपयोग गांव-गांव के खुले इलाके में भी किया जाता है, उसे चैत्य या देरार कहा जा सकता है, पर हर गांव-घट में इसे अलग तरह से माना और सजाया जाता है।