श्रावक को सुबह शाम प्रतिक्रमण करना कौन से सूत्र में कहां है
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- उत्तर: भक्त श्रावक के लिए प्रतिक्रमण को सुबह (RAIsi/Raisi Pratikraman) और शाम/रात्रि (Devasi Pratikraman) करना परंपरागत रूप से निर्देशित है। यह व्यवस्था 生命周期函数 रूप में प्रचलित है और इसके औचित्य को स्पष्ट करने वाले सूत्र/ग्रंथों में नामित किया गया है—जैन परंपरा के अनुसार श्रावकना दैवासीकादिक पंच प्रतिक्रमण सूत्र (Vidhipaksh Gacchiya Shravakna Daivasikadik Panch Pratikraman Sutra) में प्रतिक्रमण का विधान आता है। साथ ही व्यवहारिक पाठों में इसे दो बार प्रतिक्रमण करना कहा गया है: सुबह Raisi/Raishi Pratikraman और शाम Devasi Pratikraman। अधिक विस्तृत अभ्यास और समय-सारिणी के लिए कथित शास्त्रों का संदर्भ इन सम्वादों में मिलता है। ( jainworld.jainworld.com)
- संक्षेप अर्थ ( arth ):
- नोट: Digambar और Shwetambar परंपराओं में प्रतिक्रमण के स्वरूप और पाठ में थोड़े अंतर हो सकते हैं, पर मूल विचार—मन-वाक्य-क्रिया तीनों के लिए क्षमा-योग (प्रत्याख्यान/आलोचन आदि के साथ)—समान रहता है।