क्या श्रावक प्रतिक्रमण करना ठाणांग सूत्र में है
संक्षेप में जवाब: ठाणांग (Thananga) सूत्र में श्रावक प्रतिक्रमण को प्रत्यक्ष रूप से बना-बनाया भाग के तौर पर प्रस्तुत किया गया है—ऐसा मानना सामान्य नहीं है। ठाणांग एक विविध धार्मिक-नीतिक पाठ है जो दिगंबर संप्रदाय के अंग-वर्गों में आता है, जबकि श्रावक प्रतिक्रमण (Shravak Pratikraman) एक अलग épāṅक पाठ/प्रथागत प्रतिक्रमण-रीति है जिसे श्रावक-स्तर पर पढ़ा-जाता है। अक्सर प्रतिक्रमण-सूत्र (Shravak Pratikraman Sutra) और प्रतिक्रमण कराने की प्रक्रियाएँ अन्य ग्रंथों में विस्तृत होती हैं, न कि केवल Thananga में एकीकृत रूप से।
दोनों पर Digambara बनाम Śvetāmbara स्थितियाँ भी भिन्न हो सकती हैं:
- Śvetāmbara परंपरा में सम्वत्सरी (Samvatsari) प्रतिक्रमण प्रमुख होता है।
- Digambara परंपरा में दश-लोकन/दश‑लक्शण आदि अवसरों पर प्रतिक्रमण और क्षमावानी जैसे संस्कार प्रमुख रहते हैं।
अगर आप श्रद्धा के साथ प्रतिक्रमण के अर्थ और प्रकार स्पष्ट समझना चाहें, तो नीचे के समर्पित स्रोत देखें:
कृपया यह समझ लें: यदि आप चाहें तो मैं ठाणांग सूत्र के बारे में संक्षेप में Digambar बनाम Śvetāmbara संस्करणों के मतभेद भी सरल शब्दों में दे दूँ।