ठाणांग सूत्र में प्रतिक्रमण का उल्लेख बताइए
ठाणांग सूत्र में प्रतिक्रमण (Pratikraman) का प्रत्यक्ष विवरण नहीं मिलता है। प्रतिक्रमण से जुड़ी मुख्य विधि और पाठ अक्सर Pratikraman Sutra, Nav Smaran आदि जैन शास्त्रों में मिलती है, जिनमें प्रतिक्रमण की विधि, वचन, और पाठ शामिल होते हैं। खास करDevasi/Rayi/Pakhi/Chaumasi/Samvatsari जैसे प्रकारों की क्रमिक प्रथाएं इन साहित्यों में बताई जाती हैं। Digambar और Śvētāmbara परंपराओं के बीच प्रतिक्रमण के मूल उद्देश्य समान रहते हैं, पर विधि की कुछ मामूली क्रिया-कलापों में तोड़-फोड़ या पाठों के चयन में मतभेद दिख जाते हैं.
यदि आप चाहें, मैं Pratikramana Sutra (आमतौर पर प्रतिक्रमण का सबसे सटीक स्रोत) से सम्बद्ध तथ्य, क्रम और श्लोकों की सामान्य व्याख्या सरल शब्दों में दे सकता हूँ.