कौन से कर्म प्रकृति जीव को खींचकर नरक गति ले जाती है
जो कर्म नरक गति कराते हैं, वे कर्म-फल (asrava) को बाँधने वाले कर्म-कृत्यों और उनके पीछे की प्रवृत्तियाँ मिलकर बनते हैं।
- बाह्य (कर्म-प्रकार) जिन्हें नरक तक पहुँचाते हैं:
- आभ्यंतर प्रवृत्तियाँ (kasāya) जो इन कर्मों को अधिक गहराती हैं:
इन सभी के कारण जीव के भीतर कर्म-फालत (कर्मों का बँधना) बढ़ता है और नरक में पुनर्जन्म हो सकता है, अवधि के अनुसार। मार्ग साफ करने के लिए अहिं सा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, परिग्रह-अनुपालना जैसे vows और तीन jewels (Right faith, Right knowledge, Right conduct) का अभ्यास जरूरी माना गया है।
Digambar और Shvetambar परंपराओं में मूल विचार समान है; कुछ छोटे व्याकरणिक/स्थानीय विवेचन भेद हो सकते हैं, पर नरक गति के कारणों का स्वरूप कुल मिलाकर एक जैसा ही माना गया है।