audarik sharir kisse kahte hai
Audārik sharir का मतलब है gross body, यानी स्थूल शरीर. यह वही शारीरिक بدن है जो वस्त्रों, हड्डियों, मांस-त्वचा आदि से बना होता है और जिसे पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश (पंचभूत) तत्व मिलकर बनाते हैं. यह शरीर जीवन भर प्रभावित रहता है और अंत में मृत्यु के साथ समाप्त हो सकता है।
नोट:
- Jain दर्शन में शारीरिक/स्थूल शरीर के अलावा सूक्ष्म (sukshma) शरीर भी माना जाता है, जो श्वास, मन, बुद्धि आदि से मिलकर बनता है और कर्मों के संचय से जुड़ा रहता है। जैन परंपराओं में इसे ज़रूरी रूप से अलग समझा जाता है, ताकि जीवना (जीव) के भीतर आत्मा और karmas की वजह से होने वाले परिवर्तन समझ आएं।
- Digambar और Shwetambar दोनों परंपराओं में स्थूल शरीर के बारे में यही सामान्य समझ है; दोनों में स्थूल शरीर को Audārik/Shthūl sharir कहा जाता है, जबकि सूक्ष्म शरीर और आत्मा की अवधारणाएं अलग-अलग ग्रंथों में थोड़ी-थोड़ी भिन्न व्याख्या से मिलती हैं।
अगर आप चाहें, मैं इस विषय पर सरल सार प्रस्तुत कर दूँ या Jain Knowledge की संबंधित लेख से संक्षेप heading दे दूँ (आमतौर पर “audarik sharir” या “sthool sharir” के अंतर्गत).