22 din ka santhara kis mahan atma ko huaa
ऐसा कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं दिखता कि “22 दिन का संथारा” किसी खास महात्मा ने तय समय के रूप में किया हो। संथारा (Sallekhana) या संथरा एक जैन आत्मा के लिए जीवन के अंत में धीरे-धीरे भोजन-जल त्याग कर मोक्ष की ओर जाना है और इसका_DURATION_ व्यक्ति-परिस्थितियों के अनुसार भिन्न हो सकता है। यह एक विशिष्ट महाव्रत है और Digambar बनाम Shvetambar परम्पराओं में नियमों और अभ्यास के कुछ अंतर हो सकते हैं, पर मूल विचार समान है: आत्मा की शुद्धि और मोह-राग-जल्दी से विमुख होना। महावीर स्वामी के अंत के दिनों को अक्सर “म MASKHAMAN/Sallekhana” के रूप में वर्णित किया जाता है, जो एक उच्च स्तर का त्याग और आत्म-शुद्धि का उदाहरण माना जाता है; पर यह 22 दिनों तक सीमित माना गया मानक नहीं है। ( jainknowledge.com)
अगर आपको संथारा/सैलेखना के बारे में एक सरल, आधिकारिक सार चाहिए, तो आप इस पाठ को देख सकते हैं:
- Sallekhana का सार और महत्व (संक्षेप) ( jainknowledge.com)