किसका पालन नही किया तो असाता भोगना ही है
इस वाक्य में पूछा गया लगता है: अगर किसी मूल मार्ग या आचरण का पालन नहीं किया जाए तो उस व्यक्ति को असात (कठोर) परिणाम भुगतना पड़ता है या उसे दुःख उठाना पड़ सकता है।
जैन धर्म का साधारण संदेश:
- सही धर्म (सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह आदि) का पालन करने से आत्मा के कर्म सुधरते हैं और मोक्ष की राह साफ़ होती है।
- गलत आचरण, अति-आक्रामक व्यवहार, या नैतिक सिद्धांतों का उल्लंघन करने से कर्म बंधते हैं और भविष्य में जन्म-दर्शन, दुख और पुनर्जन्म जैसे karmic प्रभाव सामने आते हैं।
- खासकर व्यक्तितव (स्वयं) के लिए पांच महाव्रत/पाँच कमरेवाला आचरण हैं (अहिंसा, सत्य, अचरथ (चोरी नहीं), ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) जिन्हें निभाने से बहुधा सुख और शांति मिलती है।
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में इन विचारों के व्यावहारिक निर्देशों में कुछ भिन्नताएं हो सकती हैं, पर मूल मार्ग—कर्म से मुक्ति की दिशा—एक ही रहती है।
संक्षेप में: जो धर्म के मार्ग का पालन नहीं करता, उसे कर्मों के कारण भव-समस्या और दुःख झेलना पड़ सकता है; जो सही मार्ग अपनाता है, वही अंततः मोक्ष के करीब पहुँचता है। यदि आप चाहें, मैं इस बारे में सरल व्यावहारिक नियमों को भी थोड़ा विस्तार से समझा सकता हूँ (जैसे layman के लिए कैसे पालन करें)।