वह क्या है जिसके बिना ज्ञान समय ज्ञान नाम नहीं पता
उत्तर: चेतना (जीव)।
व्याख्या: जैन दर्शन में ज्ञान, समय, नाम आदि सभी अनुभूत वस्तुएं चेतना पर निर्भर हैं। बिना चेतना के कोई ज्ञान नहीं मिल सकता, समय का अनुभव भी जागरूक चित्त से होता है, और नाम-रूप की पहचान भी मन-चेतना के द्वारा होती है। इसलिए वह परम तत्व जिसे बिना मौजूदगी के ये सब नहीं पाते, वह है जीव/चेतना। ध्यान दें कि इस व्याख्या में Digambar और Shwetambar के बीच संकल्पनात्मक भिन्नताएं कम हैं, लेकिन मूल तत्त्व चेतना ही है।